उदयपुर में समान नागरिक संहिता को लेकर हलचल तेज, मुस्लिम महासंघ ने UCC प्रारूप समिति के सदस्य बसंत सिंह छाबा को सौंपा मांग पत्र

UCC पर मुस्लिम महासंघ का बड़ा रुख : कहा– पहले सार्वजनिक हो ड्राफ्ट, तभी सार्थक होगी जन-सुनवाई - मुस्लिम महासंघ ने UCC कमेटी को सौंपा सुझाव एवं मांग पत्र ; बोले– पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप मंजूर नहीं, समुदाय को मिले 10% आरक्षण. 



उदयपुर। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लेकर प्रदेशभर में चल रही जन-सुनवाई के बीच उदयपुर में मुस्लिम महासंघ ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुस्लिम महासंघ उदयपुर ने राजस्थान समान नागरिक संहिता (UCC) प्रारूप समिति के सदस्य और राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) बसंत सिंह छाबा को एक विस्तृत सुझाव एवं मांग पत्र सौंपकर इस कानून के वर्तमान स्वरूप और जन-सुनवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महासंघ का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार इस प्रस्तावित कानून का कोई आधिकारिक ड्राफ्ट या मसौदा जनता के सामने नहीं रखती, तब तक इस तरह की जन-सुनवाई आयोजित करने का कोई ठोस औचित्य नजर नहीं आता। महासंघ ने पुरजोर मांग की है कि पहले कानून का पूरा मसौदा सार्वजनिक किया जाए, ताकि सभी नागरिक और विभिन्न समुदाय उसके प्रावधानों को ठीक से पढ़कर अपने सार्थक सुझाव दे सकें।
प्रारूप समिति के सदस्य बसंत सिंह छाबा को सौंपे गए मांग पत्र में महासंघ ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि एक कल्याणकारी सरकार की पहली जिम्मेदारी नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता, उनकी सांस्कृतिक पहचान, सदियों पुरानी परंपराओं और व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) का संरक्षण करना राज्य सरकार का संवैधानिक दायित्व है। मुस्लिम समुदाय अपने पारिवारिक और व्यक्तिगत मामलों का संचालन अपनी धार्मिक मान्यताओं और शरीयत के मुताबिक करता है, इसलिए समान नागरिक संहिता के नाम पर मुस्लिम पर्सनल लॉ या किसी भी धार्मिक अधिकार में ऐसा कोई दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जिससे संविधान में दी गई धार्मिक आजादी पर आंच आए।
धार्मिक स्वतंत्रता के साथ-साथ मुस्लिम महासंघ ने अल्पसंख्यक समुदाय के विकास का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया है। महासंघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि राज्य सरकार वाकई सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के प्रति गंभीर है, तो उसे अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए धरातल पर काम करना होगा। इस सिलसिले में महासंघ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता छाबा के माध्यम से सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखते हुए कहा है कि मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को देखते हुए उन्हें 10 फीसदी आरक्षण देने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। इसके लिए संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। इस दौरान महासंघ के संस्थापक हाजी मोहम्मद बक्ष, हिदायत और पार्षद तोकीर रजा सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे और उन्होंने समिति के समक्ष अपनी चिंताओं को प्रमुखता से रखा।



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