बांसवाड़ा (मानगढ़ धाम)। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलाकर अलग 'भील प्रदेश' राज्य के गठन की मांग को लेकर रविवार को मानगढ़ धाम में आयोजित 'भील प्रदेश संदेश यात्रा' महासम्मेलन में जनसैलाब उमड़ पड़ा। चारों राज्यों से बड़ी संख्या में पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों ने अलग राज्य की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई।
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महासम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला की मौजूदगी रही। उन्होंने मंच से खुले तौर पर 'भील प्रदेश' की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की यह मांग न्यायसंगत है और इसे पूरा किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन में वाघेला ने कहा, "भील प्रदेश दिया जाए, इनकी डिमांड को पूरा किया जाए। इस मांग को पूरा करने के लिए हमारा भारत सरकार और राज्य सरकारों पर पूरा दबाव रहेगा कि भील प्रदेश साकार हो। आने वाले दिनों में भील प्रदेश साकार हो, ऐसी हमारी प्रार्थना है।" उन्होंने आगे कहा, "हम भले ही भील नहीं हैं, लेकिन फिर भी हम इस मांग के पूरी तरह समर्थन में हैं। क्योंकि हमें आदिवासी समाज से गहरा प्रेम है, यह हमारा ही समाज है।"
पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद 'भील प्रदेश' आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई राजनीतिक मजबूती मिलने की चर्चा तेज हो गई है। आंदोलन से जुड़े नेताओं का मानना है कि बड़े राजनीतिक चेहरों के समर्थन से केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों पर इस मांग को लेकर दबाव बढ़ेगा।
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