बांसवाड़ा जिले के ऐतिहासिक मानगढ़ धाम में भव्य रूप से आयोजित किया गया। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित इस सामाजिक एवं गैर-राजनीतिक कार्यक्रम में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से आदिवासी समाज का भारी जनसैलाब उमड़ा। आयोजकों के मुताबिक, इस महासम्मेलन में करीब 40 से 50 हजार लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा भी शामिल हुए।
अलग भील प्रदेश की मांग : महासम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों से आए वक्ताओं ने एकजुट होकर अलग 'भील प्रदेश' राज्य के गठन की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया। मंच से बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि आजादी के इतने दशकों बाद भी आदिवासी क्षेत्रों का जैसा विकास होना चाहिए था, वैसा नहीं हो पाया है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आदिवासी समाज के लोग अलग-अलग राज्यों में बंटे होने के कारण प्रशासनिक कठिनाइयों और विकास से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
यह राजनीतिक नहीं, अधिकारों की लड़ाई है : भारत आदिवासी पार्टी (बाप) के जिला उपाध्यक्ष विनोद कुमार खराड़ी ने कहा कि यह आयोजन किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों, अस्तित्व और अस्मिता की लड़ाई को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा कि बिखरे हुए आदिवासी क्षेत्रों को एक सूत्र में जोड़कर अलग भील प्रदेश का गठन किया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र के लोगों को समान अधिकार और विकास के अवसर मिल सकें।
आरक्षण और उत्पीड़न के मुद्दे भी उठे : कार्यक्रम में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के जिला संयोजक राजेश वसुनिया, प्रदेश संयोजक रविन्द्र बरजोड़ और हीरालाल दामा सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था होने के बावजूद आदिवासी युवाओं को उसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। साथ ही समाज पर होने वाले उत्पीड़न और भेदभाव के मामलों पर भी चिंता व्यक्त की गई।
सांसद राजकुमार रोत ने फोन से भेजा संदेश : बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत स्विट्जरलैंड प्रवास पर होने के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने फोन के माध्यम से संदेश भेजते हुए कहा कि चार राज्यों की सरकारों ने लंबे समय तक आदिवासी क्षेत्रों की उपेक्षा की है, जिसके कारण यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से पीछे रह गया है। उन्होंने कहा कि सरकारों के सौतेले व्यवहार के कारण ही भील प्रदेश की मांग लगातार मजबूत हो रही है।
हर वर्ष 17 जुलाई को होता है आयोजन : आयोजन समिति के भंवरलाल परमार एवं उनके सहयोगियों की देखरेख में पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण, गरिमामय और अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ। आयोजकों ने बताया कि मानगढ़ धाम पर यह महासम्मेलन प्रत्येक वर्ष 17 जुलाई को नियमित रूप से आयोजित किया जाता है।
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