UN के मंच से गूंजी आदिवासियों की आवाज | सांसद राजकुमार रोत ने जल, जंगल, जमीन के अधिकारों की उठाई आवाज

संयुक्त राष्ट्र जिनेवा में गूंजी आदिवासी समाज की आवाज, सांसद राजकुमार रोत ने ILO Convention 169 पर हस्ताक्षर की उठाई मांग

जल, जंगल, जमीन के अधिकारों और आदिवासी धर्म को संवैधानिक मान्यता देने का किया आग्रह

बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद एवं भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के नेता राजकुमार रोत ने संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा स्थित मंच से भारत सहित विश्व के आदिवासी समुदायों के अधिकारों और सम्मान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि आदिवासी प्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए, उनके द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को गंभीरता से सुना जाए तथा संबंधित देशों की सरकारों के साथ सार्थक संवाद के माध्यम से उनका समाधान किया जाए।


अपने संबोधन में सांसद रोत ने भारत सरकार से ILO Convention No. 169 पर हस्ताक्षर करने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि इससे आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन और पारंपरिक अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक संरक्षण मिल सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने आदिवासी समाज की पुरखाई धार्मिक परंपरा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग करते हुए कहा कि इससे आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को संरक्षण मिलेगा और उनकी परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित होगा। राजकुमार रोत ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और पहचान की यह लड़ाई स्थानीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक निरंतर जारी रहेगी और वे हर स्तर पर आदिवासी समाज की आवाज बुलंद करते रहेंगे।

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