ओबरी/डूंगरपुर । मोरन नदी के अस्तित्व और पर्यावरण की रक्षा के लिए आज जन-आक्रोश की एक बड़ी तस्वीर सामने आई। मोरन नदी के तट पर अवैध रूप से बनाए गए कचरा संग्रहण स्थल को हटवाने और नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए 'मोरन नदी बचाओ अभियान' के तहत सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण लामबंद हुए।
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ग्राम पटली, ग्राम पंचायत पटली एवं जोहरा नगरिया सहित आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और अपनी गंभीर पीड़ा व्यक्त की। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत ओबरी द्वारा स्वच्छ भारत अभियान की मूल भावना के विपरीत ओबरी क्षेत्र का प्लास्टिक और अन्य दूषित कचरा मोरन नदी के किनारे डंप किया जा रहा है, जिससे वहां कचरे का विशाल पहाड़ बन गया है।
इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने जेसीबी मशीनों द्वारा इस कचरे को मोरन नदी के मुख्य बहाव क्षेत्र में फैलाने का गंभीर आरोप भी लगाया है। मानसून के दौरान यह जहरीला कचरा बहकर निचले क्षेत्रों जैसे जोहरा, पटली, डायाना, अंबाड़ा, खीरेश्वर, क्षेत्रपाल मंदिर और गोरेश्वर महादेव मंदिर आदि गांवों तथा धार्मिक स्थलों तक पहुंच रहा है। इससे पेयजल स्रोत दूषित हो रहे हैं और पशुधन व आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
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भविष्य के इस बड़े संकट से चिंतित ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मोरन नदी के किनारे से इस अवैध कचरा डिपो को तत्काल नहीं हटाया गया और कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो पूरे क्षेत्र को लामबंद कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा और उग्र जन-आंदोलन किया जाएगा।
रिपोर्टर : मनोहर लाल कीर

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