पंचायतीराज चुनाव की आरक्षण लॉटरी स्थगित: अब 17 सितंबर को जिला परिषद-पंचायत समिति और 18 सितंबर को सरपंच-वार्ड पंचों की लॉटरी


जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के आगामी चुनाव को लेकर होने वाली आरक्षण एवं लॉटरी प्रक्रिया को राज्य सरकार ने एक महीने के लिए स्थगित कर दिया है। पहले पंचायत समिति प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के वार्डों की लॉटरी 17 अगस्त तथा सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी 18 अगस्त 2026 को प्रस्तावित थी। अब यह प्रक्रिया क्रमशः 17 और 18 सितंबर 2026 को होगी।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से 16 अगस्त 2026 को जारी आदेश में संबंधित अधिकारियों को नई तिथियों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

17 सितंबर को जिला परिषद और पंचायत समिति की लॉटरी
नई व्यवस्था के अनुसार जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों के वार्डों के आरक्षण एवं लॉटरी की प्रक्रिया 17 सितंबर 2026 को जिला स्तर पर आयोजित की जाएगी। इसके अगले दिन 18 सितंबर 2026 को सरपंच एवं वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी उपखंड स्तर पर निकाली जाएगी।
विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य सरकार पंचायतीराज संस्थाओं एवं नगरीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया को 15 नवंबर 2026 तक पूरा कराने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य निर्वाचन आयोग के चुनाव कार्यक्रम के अनुसार पहले नगरीय निकायों और उसके बाद पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव होने की संभावना के चलते पंचायतीराज संस्थाओं की लॉटरी की तिथियों में बदलाव किया गया है।


सोमवार को सिर्फ शहरी निकायों के वार्डों की लॉटरी
पंचायतीराज संस्थाओं की लॉटरी स्थगित होने के बाद 17 अगस्त को प्रदेश के 309 शहरी निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इस लॉटरी के माध्यम से शहरी निकायों के वार्डों में एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण की स्थिति तय होगी। वार्डों की लॉटरी जिला स्तर पर आयोजित की जाएगी। इस बार प्रदेश के निकायों में 3,356 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।

लॉटरी अचानक स्थगित होने से सियासी चर्चाएं तेज
पंचायतीराज संस्थाओं की लॉटरी को ठीक एक दिन पहले स्थगित किए जाने के बाद राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। विभागीय आदेश में लॉटरी स्थगित करने के लिए पंचायतीराज चुनाव दूसरे चरण में होने की संभावना और चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा कराने की आवश्यकता का हवाला दिया गया है। हालांकि, विपक्षी दलों की ओर से सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने अचानक लॉटरी स्थगित किए जाने को चुनाव प्रक्रिया में देरी से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है।

ओबीसी आरक्षण भी बना बड़ा मुद्दा
शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद चल रहा है। ओबीसी को निर्धारित 21 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलने के आरोपों के बीच अब पंचायतीराज संस्थाओं की लॉटरी स्थगित होने से इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो गई है। शहरी निकायों के 10,245 वार्डों में 1,933 वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित किए गए हैं, जो कुल वार्डों का करीब 18.86 प्रतिशत है। इसी को लेकर ओबीसी वर्ग से जुड़े नेताओं की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।

विधानसभा सत्र से भी जोड़कर देखा जा रहा फैसला
राजस्थान विधानसभा का सत्र 20 अगस्त से शुरू होना प्रस्तावित है। ऐसे में पंचायतीराज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी स्थगित करने के फैसले को विधानसभा सत्र से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष विधानसभा में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाने की तैयारी में है। लॉटरी स्थगित होने के बाद पंचायत समिति प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की तस्वीर अब सितंबर में होने वाली प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

चुनाव प्रक्रिया पर नजर
राज्य सरकार का लक्ष्य पंचायतीराज संस्थाओं एवं नगरीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया को 15 नवंबर 2026 तक पूरा करना है। ऐसे में अब सभी की नजरें सितंबर में होने वाली आरक्षण लॉटरी पर रहेंगी। 17 सितंबर को जिला स्तर पर और 18 सितंबर को उपखंड स्तर पर लॉटरी होने के बाद पंचायत चुनावों की तैयारियां और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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