ग्लोबल मंच पर गूंजेगी आदिवासियों की आवाज: बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत का संयुक्त राष्ट्र (UN) के EMRIP सत्र के लिए चयन, देश में हर्ष की लहर

 

बांसवाड़ा-डूंगरपुर के सांसद राजकुमार रोत वैश्विक मंच पर भारत के आदिवासी समाज की आवाज बुलंद करेंगे। सांसद राजकुमार रोत का चयन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UN Human Rights Council) के अंतर्गत आयोजित होने वाले 'Expert Mechanism on the Rights of Indigenous Peoples' (EMRIP) के 19वें सत्र के लिए हुआ है, जहां वे देश के आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरे देश और विशेषकर आदिवासी समाज में हर्ष का माहौल है तथा उन्हें चारों ओर से हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ मिल रही हैं।

सांसद राजकुमार रोत का इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर चुना जाना पूरे देश के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है। संयुक्त राष्ट्र का यह महत्वपूर्ण विशेषज्ञ मंच विश्वभर के आदिवासी समुदायों के मानवाधिकारों की रक्षा, उनकी अनूठी संस्कृति, भाषा, परंपराओं और पहचान के संरक्षण के लिए कार्य करता है। इसके साथ ही जल-जंगल-जमीन पर अधिकारों की सुरक्षा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों को विशेषज्ञ सलाह एवं सिफारिशें देना इस मंच का मुख्य उद्देश्य है। यह मंच संयुक्त राष्ट्र की आदिवासी लोगों के अधिकारों की घोषणा (UNDRIP) के प्रभावी क्रियान्वयन को भी वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देता है।
अब तक इस मंच ने आदिवासी शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, भूमि एवं प्राकृतिक संसाधनों के अधिकार, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, महिलाओं व युवाओं के अधिकार, पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा तथा 'Free, Prior and Informed Consent' (FPIC) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर कई ऐतिहासिक अध्ययन, रिपोर्ट और नीतिगत सिफारिशें प्रस्तुत की हैं, जिन्होंने विश्वभर में आदिवासी अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण को एक नई दिशा दी है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के आदिवासी समाज को पूरा विश्वास है कि सांसद राजकुमार रोत वैश्विक पटल पर जल, जंगल, जमीन, वनाधिकार, संविधान प्रदत्त अधिकारों सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, विस्थापन और आदिवासी अस्मिता से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषयों को पूरी मजबूती, तथ्यपरकता और प्रभावशीलता के साथ विश्व समुदाय के समक्ष रखेंगे। वैश्विक मंच पर गूंजने वाली उनकी यह आवाज करोड़ों आदिवासी भाई-बहनों की आशाओं, संघर्षों और आकांक्षाओं की सामूहिक अभिव्यक्ति बनेगी। यह प्रतिनिधित्व न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
देशवासियों और समाज के प्रबुद्ध जनों ने ईश्वर से उनके इस महत्वपूर्ण दायित्व के सफल निर्वहन के लिए शक्ति, साहस और दूरदृष्टि की कामना करते हुए उन्हें पुनः बधाई दी है। 





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