जयपुर | केंद्र सरकार ने राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने योग्य नहीं माना है। आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है। केंद्र सरकार के इस जवाब के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में नया उबाल आ गया है और सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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पुरातात्विक प्रामाणिकता प्रभावित होने का तर्क
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के तहत किसी भी स्थल को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने के लिए उसकी पुरातात्विक विशेषताओं, प्रामाणिकता और अखंडता का बना रहना अनिवार्य है। साइट के निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि मानगढ़ धाम पर हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर आधुनिक विकास और निर्माण कार्य किए गए हैं। इन बदलावों के कारण यह स्थल अपनी मूल पुरातात्विक अखंडता को कायम नहीं रख पाया है, जिस वजह से इसे 1958 के अधिनियम के तहत राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
सांसद राजकुमार रोत का तीखा हमला
सरकार के इस रुख पर बांसवाड़ा-डूंगरपुर से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सांसद रोत ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने हमेशा आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है। मानगढ़ धाम पर हजारों आदिवासियों ने देश के लिए अपनी शहादत दी थी, लेकिन किसी भी बड़े नेता ने इस ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने के लिए सही मायनों में पैरवी नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह फैसला मानगढ़ धाम और वहां शहीद हुए आदिवासियों का अपमान है।
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महंत की अलग राय : राष्ट्रीय स्मारक बनने से होतीं समस्याएं
वहीं दूसरी ओर, मानगढ़ धाम के महंत रामचंद्र महाराज ने इस विषय पर अलग दृष्टिकोण रखा है। उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के लाखों आदिवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। महंत के अनुसार, यदि इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया जाता, तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सख्त नियमों के कारण स्थानीय समाज और श्रद्धालुओं को आवाजाही और धार्मिक आयोजनों में कई तरह की व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता था।
2022 में हुई थी सिफारिश
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) के तत्कालीन अध्यक्ष तरुण विजय ने 6 जुलाई 2022 को मानगढ़ पहाड़ी को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की औपचारिक सिफारिश की थी। उन्होंने इस संबंध में अपनी विस्तृत रिपोर्ट तत्कालीन कला एवं संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को सौंपी थी, जिसमें स्थल के ऐतिहासिक महत्व का पूरा ब्योरा दिया गया था।
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राजस्थान का ‘जलियांवाला बाग’ है मानगढ़
मानगढ़ धाम को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में राजस्थान के 'जलियांवाला बाग' के रूप में जाना जाता है। 17 नवंबर 1913 को महान आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी गोविंद गुरु के नेतृत्व में लगभग 1.5 लाख भील आदिवासियों ने मानगढ़ पहाड़ी पर शांतिपूर्ण सभा की थी। ब्रिटिश सेना ने इस सभा को चारों तरफ से घेरकर अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं, जिसमें लगभग 1,500 से अधिक आदिवासी वीर शहीद हो गए थे। वर्तमान में मानगढ़ धाम स्थित शहीद स्मारक की दीवारों पर उकेरे गए शिलालेख और पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियां इस ऐतिहासिक नरसंहार की गाथा बयान करती हैं। तीनों राज्यों के आदिवासियों के लिए यह स्थल आज भी सर्वोच्च सम्मान और आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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